जन्नत की चाहत

इस जन्नत की चाहतों ने जहाँ को जहन्नुम बना दिया, इस इंसान की मग़रूरी ने मोमिन को काफ़िर बना दिया।  रहबरों की तानाशाही ने वतनों को खोखला कर दिया,  आवाम को ग़ुमराह कर के ईमान को नीलाम कर दिया।  औरतों की न आबरू बची आदमियों को मजबूर कर दिया, बच्चों को बंदूक थमा दी  मासूमियत… Continue reading जन्नत की चाहत