औरत

उसकी ख़ामोशी है, उसकी सहमती न समझें
उसका शर्माना अदा है, उसकी इजाज़त न समझें

उसके आँसू हैं, उसकी रुसवाई न समझें
जज़बातों का ज़रिया है, उसकी शिकायत न समझें

उसकी सहनशीलता है, उसकी कमज़ोरी न समझें
छुपाती है तुम्हारे सितम के राज़, उसको अबला न समझें

उसका दिल दरिया है, उसको पत्थर न समझें
उस में डूबे हैं जहाँ के ग़म, उसकी शिकस्त न समझें

Copyright © 2018 Pratish Shah
8 March 2018

 

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