ज़िन्दगी के चार लम्हे

    ज़िन्दगी के चार लम्हे, देखते-देखते गुज़र जायें दो पल तेरे साथ बीतें, दो पल याद में गुज़र जायें। दीवारों से प्यार नहीं, मिलके रो लेता हूँ कभी इश्क़ की कीमत अदा करते बस, उम्र गुज़र जाये। मैखाने में भरे जाम को फकत, छू लेता हूँ कभी नशे की आदत तो नहीं बस, शाम… Continue reading ज़िन्दगी के चार लम्हे