लफ्सों में क्या इतनी ताकत?

लफ्सों में क्या इतनी ताकत?
हंगामा यह बेशुमार क्यों है?
दोस्तों की चंद बातों से
बनती यह दरार क्यों है?

दिल है अपना साफ़ तो
टोकने पे तकरार क्यों है?
नीयत नहीं खराब तो
बेमतलब बेकरार क्यों है?

केहनो दो, सुनने दो सबको
अहम से इतना प्यार क्यों है?
पढ़ने दो, लिखने दो सबको
मान्यता का इंतज़ार क्यों है?

किसीके तपते बोलो से
तुमको यह बुख़ार क्यों है?
बोलने दो दुनिया वालों को
बेवज़ह तू बिमार क्यों है?

लफ्सों में क्या इतनी ताकत?
हंगामा यह बेशुमार क्यों है?
दोस्तों की चंद बातों से
बनती यह दरार क्यों है?

Copyright © 2016 Pratish Shah

10/28/2016

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