लफ्सों में क्या इतनी ताकत?

लफ्सों में क्या इतनी ताकत? हंगामा यह बेशुमार क्यों है? दोस्तों की चंद बातों से बनती यह दरार क्यों है? दिल है अपना साफ़ तो टोकने पे तकरार क्यों है? नीयत नहीं खराब तो बेमतलब बेकरार क्यों है? केहनो दो, सुनने दो सबको अहम से इतना प्यार क्यों है? पढ़ने दो, लिखने दो सबको मान्यता का… Continue reading लफ्सों में क्या इतनी ताकत?

याद आते हैं कभी लड़कपन के दिन

याद आते हैं कभी लड़कपन के दिन वह दिन भर की मस्ती फिक्रों के बिन खेलना और छेड़ना सिर्फ मक़सद हमारा ‘ऐसे ही’ गुज़रते थे साल, महीने और दिन।   याद आते हैं कभी मोहब्बत के दिन वह दिन भर भटकना मंज़िल के बिन जो बिछेडे, दिल होता बेबस हमारा न कटती थी रातें, न… Continue reading याद आते हैं कभी लड़कपन के दिन