समर्पण पे दोहे

(Couplets on Surrender) तेरी ही दुनिया, तूने बुलाया, करेगा मेहमान-नवाज़ी भी तू तेरे ही दर पे कब से खड़ा हूँ, जल्दी से आकर अपना ले तु। चली हवा तो चल पड़ा, थमी हवा तो थम गया सूखे पत्ते सी हो ज़िंदगी, तेरी रज़ा में जो रम गया। ना मौजों का डर, ना किनारे की ख्वाइश,… Continue reading समर्पण पे दोहे