नज़रें हैं बेक़रार यूँही

नज़रें हैं बेक़रार यूँही, तेरे मिलने के लिए
उलफ़त की नज़र डाल दे, दिल बहलाने के लिए

ढूँढ़ता था जिसे मिला उम्र गुज़र जाने के बाद
जब सेंक्डों थें दुनिया में आज़माने के लिये

नज़रें हैं बेक़रार यूँही,…

एक बूँद मिल जाती भुजाने को मुद्दतों की फर्याद
तरसें थे हम रुख़सार-ए-यार करने के लिए

नज़रें हैं बेक़रार यूँही,…

शाम हुवी थी जवां पर रूकी नहीं रंगीन होने तलक
वक़्त ठहरता ही नहीं, दीदार-ऐ-यार करने के लिए

नज़रें हैं बेक़रार यूँही,…

खून-ए-जिगर रख देता पाने को फ़िर उसकी झलक
वक़्त और मिलता अगर हाल-ए-दिल बताने के लिए

नज़रें हैं बेक़रार यूँही,…

भैटें रहें उम्मीद में हम, होगी मुलाक़ात कहीं
अब तो सिर्फ याद हैं उम्र भर सताने के लिए

नज़रें हैं बेक़रार यूँही,…

वह एक नज़र, एक विसाल-ए-यार ही सही
और ग़म हैं बहुत दुनिया में उठाने के लिए

नज़रें हैं बेक़रार यूँही,…

Copyright © 2014 Pratish Shah (November 07, 2014)
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