नज़रें हैं बेक़रार यूँही

नज़रें हैं बेक़रार यूँही, तेरे मिलने के लिए उलफ़त की नज़र डाल दे, दिल बहलाने के लिए ढूँढ़ता था जिसे मिला उम्र गुज़र जाने के बाद जब सेंक्डों थें दुनिया में आज़माने के लिये नज़रें हैं बेक़रार यूँही,… एक बूँद मिल जाती भुजाने को मुद्दतों की फर्याद तरसें थे हम रुख़सार-ए-यार करने के लिए नज़रें… Continue reading नज़रें हैं बेक़रार यूँही